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Mahakal - महाकाल की अमर कथा

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  🔱 महाकाल की अमर कथा | Mahakal Story in Hindi उज्जयिनी नगरी प्राचीन काल से ही धर्म, तप और तंत्र की भूमि रही है। इसी पवित्र भूमि पर विराजमान हैं भगवान महाकालेश्वर — जो केवल शिव नहीं, बल्कि काल के भी स्वामी (महाकाल) हैं। 🌸 उज्जयिनी और शिव भक्ति बहुत समय पहले उज्जयिनी पर एक राक्षस का आतंक था। उसका नाम था दूषण । वह शिव भक्तों से घृणा करता था और नगर के ब्राह्मणों, साधुओं और शिव उपासकों को कष्ट देता था। शिव मंदिरों को तोड़ना और यज्ञ नष्ट करना उसका उद्देश्य था। नगरवासी भयभीत होकर भगवान शिव की आराधना करने लगे। दिन-रात “ॐ नमः शिवाय” का जाप गूंजने लगा। बच्चों से लेकर वृद्धों तक सबकी एक ही पुकार थी — “हे महादेव, हमारी रक्षा करो।” 🔥 भगवान शिव का प्रकट होना भक्तों की करुण पुकार सुनकर स्वयं भगवान शिव पृथ्वी पर प्रकट हुए , लेकिन इस बार वे किसी सौम्य रूप में नहीं आए। वे प्रकट हुए उग्र रूप — महाकाल में। धरती फट गई, आकाश कांप उठा, और उसी भूमि से प्रकट हुआ एक ज्योतिर्लिंग । उस लिंग से निकले भगवान शिव ने दूषण राक्षस का संहार कर दिया। उनका यह रूप इतना भयानक था कि स्वयं काल भी भयभीत हो गय...

Mahadev Bhakti Katha - भगवान शिव की भक्ति कथा - महादेव की महिमा (पूरी कहानी)

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शिव भक्ति की संपूर्ण कथा | भगवान शिव की महिमा Lord Shiva Meditation 🔱 शिव भक्ति की संपूर्ण कथा – भगवान शिव की महिमा भगवान शिव, जिन्हें महादेव, शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ और आदियोगी कहा जाता है, हिंदू धर्म की आत्मा माने जाते हैं। शिव केवल एक देवता नहीं हैं, बल्कि चेतना, सत्य और मोक्ष का मार्ग हैं। शिव भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन को सरल, निष्कपट और सत्य के मार्ग पर चलाना है। जो शिव को समझ लेता है, वह संसार के बंधनों से मुक्त हो जाता है। 🕉️ शिव कौन हैं? – आदि, अनंत और असीम शिव को आदि और अंत से परे माना गया है। वे न जन्म लेते हैं, न मरते हैं। वे सृष्टि से पहले भी थे और सृष्टि के बाद भी रहेंगे। इसीलिए उन्हें महाकाल कहा जाता है। शिव योगी हैं, तपस्वी हैं, गृहस्थ भी हैं। वे कैलाश में ध्यान करते हैं, लेकिन भक्तों के कष्ट में तुरंत दौड़े चले आते हैं। यही कारण है कि उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है। शिव का संदेश: “त्याग में ही सच्चा सुख है, और अहंकार ही सबसे बड़ा विष है।” 🌙 भगवान शिव का स्वरूप और उसके अर्थ ...