Bhima Koreghav - भीमा कोरेगांव का इतिहास | 1818 का युद्ध, महार वीरता
भीमा कोरेगांव की कहानी - (शौर्य, स्वाभिमान और इतिहास की अमर गाथा) प्रस्तावना भारत के इतिहास में कई युद्ध हुए, कई साम्राज्य गिरे और कई उठे। लेकिन कुछ युद्ध केवल तलवारों से नहीं लड़े जाते, वे सम्मान, अस्तित्व और स्वाभिमान के लिए लड़े जाते हैं। 1 जनवरी 1818 को लड़ा गया भीमा कोरेगांव का युद्ध ऐसा ही एक युद्ध था, जिसने इतिहास की धारा को मोड़ दिया और सदियों से दबे समाज को अपनी पहचान का अहसास कराया। भीमा कोरेगांव कहाँ है? भीमा कोरेगांव महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में स्थित एक छोटा-सा गाँव है। यह गाँव भीमा नदी के किनारे बसा है। आज यह स्थान केवल एक गाँव नहीं, बल्कि इतिहास, संघर्ष और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। पेशवाओं का शासन और सामाजिक स्थिति 18वीं शताब्दी में महाराष्ट्र पर पेशवा शासन था। पेशवा मराठा साम्राज्य के वास्तविक शासक थे। लेकिन इस शासन में समाज जातिगत भेदभाव से बुरी तरह जकड़ा हुआ था। महार, मांग और अन्य दलित समुदायों को गाँव में प्रवेश की अनुमति नहीं हथियार रखने पर रोक अपमानजनक व्यवहार शिक्षा से वंचित इन समुदायों को अमानवीय जीवन ...